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राज्यसभा चुनाव को लेकर प्रक्रिया शुरू, भाजपा में दूसरी सीट के लिए मंथन तेज

कांग्रेस के विधायकों को तोड़ सकने वाले चेहरे पर भाजपा नेताओं की नजर टिकी

Satyakhabarindia

 

 

सत्य खबर हरियाणा

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Rajyasabha Election : केंद्रीय चुनाव आयोग ने हरियाणा की दो राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव प्रक्रिया शुरू कर दी है। भाजपा के किरण चौधरी और रामचंद्र जांगड़ा का कार्यकाल 9 अप्रैल को समाप्त हो रहा है। एक सीट भाजपा और एक कांग्रेस के खाते में जानी तय है। वरिष्ठ आईएएस अधिकारी पंकज अग्रवाल को रिटर्निंग अधिकारी नियुक्त किया गया है। नामांकन 5 मार्च तक होंगे, और यदि आवश्यक हुआ तो 16 मार्च को मतदान होगा। भाजपा कांग्रेस की सीट पर भी नजर गड़ाए हुए है। कांग्रेस के खेमे में सेंध लगाने के लिए उस सीट पर भाजपा कांग्रेस के किले में सेंधमारी करने के लिए भाजपा ऐसे व्यक्ति पर नजर टिकाए हुए है जो कांग्रेस के विधायकों को तोड़ने में सक्षम हो। इस कड़ी में पहले सुभाष चंद्रा, गोपाल कांडा, रूप बंसल के नाम चर्चा में थे लेकिन अब इस कड़ी में एक और नाम जुड़ गया है जो तरुण भंडारी का है।

भाजपा की राजनीतिक गलियां में चर्चा है कि भाजपा दूसरी सीट पर सीएम के राजनैतिक सचिव व पुराने कांग्रेसी तरुण भंडारी को संभावित उम्मीदवार बना सकती है। तरुण भंडारी ही वह शख्स है जो नवीन जिंदल, किरण चौधरी जैसे दर्जनों चेहरों को अतीत में भाजपा में शामिल करवा चुके हैं। केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल का पंचकूला में तरुण भंडारी के घर अचानक पहुंचना कई राजनैतिक संकेत दे गया है। हालांकि मनोहर लाल की तरुण भंडारी के घर पर यात्रा पारिवारिक यात्रा कही जा रही है लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री तथा वर्तमान में केंद्रीय ऊर्जा मंत्री की इस यात्रा से राजनीतिक गलियारों में नए सियासी समीकरण बनने लगे हैं।

आधिकारिक तौर पर कहा जा रहा है कि यह यात्रा मनोहर लाल की पारिवारिक यात्रा थी, परिवार से मिले। गपशप की व काफी समय बिताया। कोई राजनैतिक कार्यक्रम नहीं था। लेकिन वर्तमान के राजनीतिक हालातों और तरुण भंडारी की राजनीतिक क्षमता को देखते हुए यह यात्रा पारिवारिक यात्रा से आगे बढ़कर राजनीतिक यात्रा के रूप में शामिल हो गई है। तरुण भंडारी वर्तमान में केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल व हरियाणा के सीएम नायब सिंह सैनी दोनों के काफी नजदीक हैं। भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व में भी इनकी खासी पकड़ है। तरुण भंडारी न केवल हरियाणा बल्कि हिमाचल में भी अपने राजनीतिक कौशल का प्रदर्शन कर चुके हैं। हिमाचल की सुक्खू सरकार के निर्दलीय व कांग्रेस विधायकों में भंडारी अपने रण कौशल का परिचय देकर हिमाचल के हर्ष महाजन को राज्यसभा सीट जितवा चुके हैं। भाजपा के सूत्र मानते हैं कि जिस प्रकार से तरुण भंडारी पूर्व में हरियाणा में कांग्रेस के नेताओं को भाजपा में शामिल कर चुके हैं और हिमाचल में बड़ा खेल दिखा चुके हैं अगर उन्हें हरियाणा में राज्यसभा का उम्मीदवार बनाया गया तो यही खेल वह हरियाणा कांग्रेस के विधायकों में खेल सकते हैं।

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फिलहाल हरियाणा से पंजाबी चेहरे में से कोई भी राज्यसभा में नहीं है। ऐसे में सबसे बड़ी दावेदारी पंजाबी समुदाय की मानी जा रही है। हालांकि कैप्टन अभिमन्यु, ओमप्रकाश धनखड़ प्रदेश भाजपा के अलावा राष्ट्रीय स्तर पर भी बीजेपी के बड़े जाट चेहरे हैं। फिलहाल रामचंद्र जांगड़ा पिछड़ा वर्ग, किरण चौधरी तथा सुभाष बराला जाट समाज, इसके अलावा रेखा शर्मा और निर्दलीय कार्तिकेय शर्मा जो कि भाजपा के समर्थन से बने हैं। दोनों ही ब्राह्मण समाज से हैं। ऐसे में राजनीतिक पंडितों की माने तो सभी लोगों के हिस्सेदारी को देखते हुए पंजाबी वैश्य या फिर अनुसूचित जाति के किसी नेता की लॉटरी भी लग सकती है। क्योंकि प्रदेश में मुख्यमंत्री का पद भी पिछड़े वर्ग के रूप में नायब सैनी के पास है। यह देखने वाली बात होगी की कांग्रेस के अलावा बीजेपी से भी अगला राज्यसभा सदस्य कौन होगा लेकिन भाजपा की रणनीति हमेशा चौकाने वाली ही होती है।

बता दें कि तरुण भंडारी ने 2019 में कांग्रेस छोड़कर बीजेपी ज्वाइन की थी। उसके बाद से ही अब तक लगातार वह पूरे देश में कांग्रेस के 100 के करीब बड़े चेहरों को बीजेपी में शामिल करवा चुके हैं। किरण चौधरी और उनकी बेटी श्रुति चौधरी का बीजेपी में शामिल होना तरुण भंडारी की राजनीतिक रणनीति का एक हिस्सा है। मनोहर लाल के बीरबल के रूप में भूमिका निभाने वाले तरुण भंडारी मौजूदा मुख्यमंत्री नायब सैनी के भी खास व्यक्तियों में शुमार हो चुके हैं। किरण और श्रुति चौधरी के बीजेपी में शामिल होने के लिए पार्टी मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम में भी तरुण भंडारी प्रमुख चेहरे के रूप में नजर आ रहे थे।

इससे पहले हरियाणा में लोकसभा चुनाव से ठीक पहले तरुण भंडारी ने कांग्रेस के पूर्व सांसद नवीन जिंदल और कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अशोक तंवर को भी बीजेपी में शामिल करवाया था, जिन्हें पार्टी ने क्रमश: कुरुक्षेत्र और सिरसा से लोकसभा चुनाव में उतारा था। इनमें नवीन जिंदल चुनाव जितने में कामयाब हो गए थे, लेकिन अशोक तंवर चुनाव नहीं जीत पाए थे। हालांकि तंवर के चुनाव हारने के पीछे कई कारण बताए जा रहे है, जिनमें उनकी ओर से लगाया गया पार्टी पदाधिकारियों के भीतरघात का आरोप भी एक है। बाद में तंवर फिर कांग्रेस में लौट गए।

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अपने कुशल राजनीतिक कौशल का परिचय दे चुके तरुण भंडारी मनोहर लाल के अलावा हरियाणा में पार्टी के चाणक्य बनते जा रहे हैं। उनके कुशल राजनीतिक कौशल का ही कारण है कि वह पार्टी हाई कमान के भी चहेते नेताओं में शुमार होते जा रहे हैं।

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